आज ही के दिन देश को मिली थी हाईकोर्ट की पहली महिला जज, नारी सशक्तिकरण की हैं उदाहरण

New Delhi: साल 1991 में आज ही के दिन देश को उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश मिली थी। 5 अगस्त 1991 को लीला सेठ ने उच्च न्यायालय की सर्वप्रथम महिला चीफ जस्टिस के रूप में पदभार संभाला था। साथ ही दिल्ली उच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश बनने का श्रेय भी इन्हीं को प्राप्त है।

महिला सशक्तिकरण की प्रतीक लीला सेठ का जन्म 20 अक्टूबर, 1930 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ। कम उम्र में ही इनका विवाह बाटा कंपनी में काम करने वाले प्रेम के साथ हुआ। उस समय लीला ग्रेजुएश भी नहीं कर पाई थीं। बाद में प्रेम को इंग्लैंड में नौकरी के लिए जाना पड़ा तो वह भी उनके साथ इंग्लैंड चली गई, जहां से उन्होंने ग्रेजुएशन किया।

कुछ समय बाद वह भारत लौट आई और यहां आकर वकालत की प्रैक्टिस शुरू कर की। एक ऐसे समय में जब नौकरियों में महिलायों की संख्या बहुत कम थी, लीला जी का यह कदम काफी चुनौतिपूर्ण रहा। लीला सेठ ने कड़ी मेहनत के बूते पर कई कीर्तिमान अपने नाम किए। वे 1958 में लंदन में BAR की परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाली पहली महिला बनीं। अगले साल 1959 में वह BAR में शामिल हुई।

1978 में वे दिल्ली उच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश बनीं और बाद में 1991 में हिमाचल प्रदेश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त की गईं। भारत के 15वें विधि आयोग की सदस्य बनने और कुछ चर्चित न्यायिक मामलों में विशेष योगदान के कारण लीला सेठ का नाम विख्यात है। महिलाओं के साथ भेद-भाव के मामले और संयुक्त परिवार में लड़की को पिता की सम्पति में बराबर की हिस्सेदार बनाने जैसे मामलों में लीला सेठ की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।

इसके अलावा वे कई जांच आयोगों की सदस्य भी रहीं। लीला सेठ लोकप्रिय सिरियल शक्तिमान का बच्चों पर पड़ रहे असर की जांच करने के लिए बनाए गए आयोग की भी सदस्य रहीं। 86 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से नोएडा स्थित निवास पर मां न्यायमूर्ती लीला सेठ जी ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘ऑन बैलेंस’ में जिंदगी की कई खट्टी-मीठी यादों और घर परिवार से जुड़े कई कड़वे अनुभवों को उजागर किया है।

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