मरकर भी जी गई नीलम, 1 साल में कैंसर के मुंह से वापस आई, अब कर रही है कैंसर पीड़ितों की मदद

New Delhi: कैंसर….कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनकर अच्छे अच्छों की हवा टाइट हो जाती है। कैंसर के नाम से ही इंसान जीने की सारी उम्मीदें छोड़ देता है, लेकिन जब मन में जीने की चाह और आत्मविश्वास हो तो कैंसर को भी आपके सामने हार माननी पड़ती है। कुछ ऐसा ही उदाहरण बनकर लोगों के बीच आई हैं डॉ. नीलम चंद्रा शर्मा।

नीलम सदर की रहने वाली हैं। इन्हें साल 2012 में कैंसर हुआ था। नीलम ने बताया कि पहले इस बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन धीरे-धीरे जब तकलीफ बढ़ती गई तब मुझे समझ में आया कि इसे इग्नोर करना गलत है। मुझे तकलीफ इतनी बढ़ की बर्दाश्त करना मुश्किल था। तकलीफ बढ़ने के बाद नीलम डॉक्टर के पास गई। पता चला कि कैंसर अब दूसरी स्टेज पर है। पहले ब्रेस्ट को ऑपरेट करके गठाने निकाली गईं लेकिन उसके बाद कैंसर कॉलर बोन तक पहुंच गया। डॉक्टरों ने कहा कि अब आगे का इलाज नामुमकिन है।

अब ऐसी स्थिति में सबने हौसला खो दिया था। परिवार वालों ने सोच लिया था कि अब दोबारा कभी नीलम का चेहरा नहीं देख पाएंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। किस्मत बदली और नीलम की जिंदगी में मानों बहार आ गई। नीलम ने बताया कि आध्यात्म ने उन्हें मौत के मुंह से बाहर निकाला है। बता दें कि नीलम की परवरिश आध्यात्मिक माहौल में हुई है। जब पता चला था तब ट्रॉमा में थी, डिप्रेशन में थी। टाटा मेमोरियल में एडमिट थी, तो पूरा दिन बस प्रार्थना करने में गुजरता था। मुझे यकीन था कि प्रार्थना व्यर्थ नहीं जाएगी।

पूरे एक साल के संघर्ष और इलाज के बाद मेरा कैंसर ठीक हो पाया। जब मैं लौट कर आई तो लोगों ने बड़ी उम्मीद से पूछा कि मैं ठीक कैसे हो गई। तब लगा कि कैंसर लोगों के शरीर के साथ-साथ मन को भी तोड़ता है। इस समय पर उन्हें मोटिवेट करने की जरूरत होती है। यही सोचकर कैंसर मरीजों की काउंसिलिंग शुरू की।

लोगों को कैंसर से लड़ने की शक्ति देने के लिए ब्रह्माकुमारी और आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ी। इनसे बहुत शक्ति मिली। यही बात मैंने दूसरे कैंसर मरीजों को भी समझाई कि मेडिटेशन में बहुत शक्ति है। आज लोग फेसबुक, व्हॉट्सअप पर मुझसे काउंसिलिंग लेते हैं। अच्छी बात यह है कि मेरे पति भी मेरे साथ लोगों की काउंसिलिंग करने जाते हैं। जो मरीज चल-फिर नहीं पाते हम उनके घर जाकर काउंसिलिंग करते हैं। और कुछ को घर बुलाकर भी बात करते हैं। मुझे लगता है कि ईश्वर ने मुझे इसी काम के लिए मेरा जीवन दिया है। मुझे संतुष्टि मिलती है कैंसर रोगियों से बात करके।

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