दसवीं पास महिला ने कर दिखाया कमाल, खेतों में उगाई सब्जियां, आज कैंसर से लड़ने में है मददगार

NEW DELHI: कहते हैं ना कि अगल हौसला बुलंद हो तो अकेले दम पर बड़े से बड़ा काम भी आसानी से किया जा सकता है। ऐसे ही हौसले और जज्बे की मिसाल बन चुकी हैं पंजाब की महिला किसान मनजीत कौर। मनजीत कौर खेती के जरिए वो काम कर रही हैं, जो आपकी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं।

दरअसल, मनजीत की बेटी को कैंसर थी। कैंसर की वजह से मनजीत ने अपनी बेटी हमेशा के लिए खो दिया। बेटी को खोने का गम तो मनजीत को बहुत हुआ, लेकिन वह कैंसर से लड़ने से ठान ली। बता दें कि मनजीत ने सिर्फ दसवीं तक की पढ़ाई की है, लेकिन इनका दिमाग किसी Phd होल्डर से कम नहीं है। मनजीत कौर ग्यारह साल पहले गरीबी से जूझ रही थी, लेकिन आज वे 50 से ज्यादा महिलाओं को नौकरी दे चुकी हैं। जो महिलाएं कभी चूल्हा-चौके तक सीमित थीं, इनसे जुड़कर बीस हजार रुपए महीना कमा रही हैं।

मनजीत ने बताया कि बेटी का कैंसर ठीक कराने के लिए मैं दर-दर भटकती रही। डॉक्टर के पास गईं तो पता चला कि फसलों में रासायनिक खादों व कीटनाशकों के इस्तेमाल के कारण कैंसर की शिकायत बढ़ रही है। यहीं से उन्होंने ऑर्गेनिक खेती करके कैंसर से लड़ने की ठानी। दिल की इच्छा कुछ महिलाओं से शेयर की तो इस जंग में उनका भी साथ मिला। इन्होंने मदर टेरेसा ग्रुप बनाया, ठेके पर जमीन लेकर ऑर्गेनिक खेती शुरू कर दी। पहले एक एकड़ में की। अब पांच एकड़ में खेती हो रही है। इलाके की लगभग 50 महिलाएं इस ग्रुप से जुड़ चुकी हैं। समूह में कोई पुरुष शामिल नहीं है। सभी काम महिलाएं खुद करती हैं। मनजीत कौर बताती हैं कि जब उन्हें पता चला कि रासायनिक खादों व कीटनाशकों से कैंसर की बीमारी पैदा हो रही है तो मन बहुत दुखी होता था।

लिहाजा उन्होंने एक तीर से दो निशाने साधने का निर्णय लिया। एक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का, दूसरा ऑर्गेनिक खेती से कैंसर को मात देने का। मदर टेरेसा ग्रुप की महिलाओं द्वारा तैयार किया गया ऑर्गेनिक गुड़ व शक्कर देश ही नहीं, विदेश में भी मिठास घोल रहा है। वर्तमान में करीब तीस क्विंटल गुड़ व शक्कर कनाडा, ब्रिटेन आदि देशों में जाता है। इस क्षेत्र के लोग विदेश में काफी संख्या में हैं। वे जब भी आते हैं तो खुद और अपने रिश्तेदारों के लिए गुड़ व शक्कर लेकर जाते हैं।

ग्रुप की ओर से तैयार किये जा रहे उड़द, साग, सब्जियों, जैविक पापड़ व बड़ियों की भी काफी मांग है। मदर टेरेसा ग्रुप की दस महिलाओं ने एक एकड़ जमीन को ऑर्गेनिक खेती के लायक बनाने लिए तीन साल तक कठिन परिश्रम किया। इस दौरान रासायनिक खाद और कीटनाशक से उसे मुक्त रखा और गोबर का इस्तेमाल ही किया जाता रहा। फिर ऑर्गेनिक गन्ना, गेहूं व सब्जियां उगानी शुरू की।

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